Donald Trump Election Claims: अमेरिका में मिडटर्म चुनाव से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर चुनावी प्रक्रिया को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। व्हाइट हाउस से दिए गए अपने प्राइम-टाइम संबोधन में ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी चुनाव प्रणाली में "चौंकाने वाली कमियां" हैं और चीन ने वर्ष 2020 के राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की थी। हालांकि, अपने आरोपों के समर्थन में उन्होंने कोई सार्वजनिक और ठोस सबूत पेश नहीं किया। चीन पर ट्रंप के गंभीर आरोप करीब आधे घंटे के संबोधन में ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार ने सैकड़ों खुफिया दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं, जिनसे कथित तौर पर यह संकेत मिलता है कि बीजिंग ने तत्कालीन चुनाव को जो बाइडन के पक्ष में मोड़ने का प्रयास किया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चीन ने लगभग 22 करोड़ मतदाताओं का निजी डेटा अवैध रूप से हासिल किया और 18 राज्यों के वोटर रिकॉर्ड खरीदे, चुराए या हैक किए। खुफिया रिपोर्ट ने नकारे दावे हालांकि, अमेरिकी खुफिया एजेंसियां पहले ही स्पष्ट कर चुकी हैं कि उन्हें 2020 के चुनाव में चीन की किसी प्रत्यक्ष दखलअंदाजी का कोई प्रमाण नहीं मिला। वर्ष 2021 में जारी नेशनल इंटेलिजेंस काउंसिल की रिपोर्ट में कहा गया था कि चीन ने चुनाव परिणाम बदलने के उद्देश्य से कोई हस्तक्षेप नहीं किया। रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने संभावित विकल्पों पर विचार जरूर किया, लेकिन उन्हें लागू नहीं किया क्योंकि ऐसा करना उसके लिए अधिक जोखिम भरा था। वोटिंग सिस्टम पर उठे सवाल ट्रंप ने अपने भाषण में यह भी कहा कि अमेरिकी वोटिंग मशीनें रूस, चीन और ईरान जैसे देशों की साइबर गतिविधियों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं। उन्होंने मिशिगन में कथित वोटर रजिस्ट्रेशन धोखाधड़ी का भी उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि जांच एजेंसियों को समय रहते कार्रवाई करने से रोका गया। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि इन आरोपों का चुनावी नतीजों पर वास्तविक प्रभाव पड़ा या नहीं। भाषण के तुरंत बाद चीन ने भी आरोपों को खारिज कर दिया। वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास ने कहा कि बीजिंग ने कभी भी अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में हस्तक्षेप नहीं किया है और भविष्य में भी ऐसा नहीं करेगा। डेमोक्रेट्स ने ट्रंप घेरा उधर, डेमोक्रेटिक पार्टी ने ट्रंप के बयान को चुनाव से पहले मतदाताओं के मन में संदेह पैदा करने की कोशिश बताया। सीनेट में डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर ने कहा कि अमेरिका में नेता नहीं, बल्कि मतदाता अपने प्रतिनिधि चुनते हैं और चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा बनाए रखना लोकतंत्र के लिए जरूरी है। पूर्व उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने भी सोशल मीडिया पर ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा कि लोगों को मतदान से हतोत्साहित करने की कोशिश की जा रही है। SAVE America Act पर जोर अपने संबोधन के अंत में ट्रंप ने फिर से SAVE America Act को पारित करने की मांग दोहराई। इस प्रस्तावित कानून में अधिकांश मेल-इन वोटिंग पर रोक, मतदाता पंजीकरण के लिए नागरिकता का प्रमाण और मतदान के समय फोटो पहचान पत्र अनिवार्य करने का प्रावधान है। यह विधेयक फिलहाल सीनेट में लंबित है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मिडटर्म चुनाव से पहले चुनावी सुरक्षा और वोटिंग सिस्टम को लेकर शुरू हुई यह बहस आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है। ऐसे समय में जब ट्रंप की लोकप्रियता को लेकर हालिया सर्वेक्षणों में गिरावट दर्ज की गई है, उनके इस बयान ने अमेरिकी राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। ये भी पढ़ें: तेल ठिकानों पर हमला क्यों नहीं किया? ट्रंप ने खोले अमेरिकी प्लान के राज